मंदिर के बारे में

हमारे पावन तीर्थ की समृद्ध विरासत और इतिहास के बारे में जानें।

परिचय और देव स्वरूप

Main idol of Lord Rishabhdeo

देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रबन्धित एवं नियंत्रित आत्मनिर्भर श्रेणी के इस ऋषभदेवजी मंदिर में भगवान ऋषभदेवजी की श्याम वर्ण की लगभग 105 से.मी. भव्य आकार की ऊंची प्रतिमा ऋषभदेव गांव में पहाड़ों की ओट में निर्मित मंदिर में विराजमान है। इस प्रतिमा का पूजन भक्तगण प्राचीन समय से ही केसर से करते चले आ रहे हैं, अतः इन्हें 'केसरियानाथ' कहते हैं। स्थानीय प्रदेश के आदिवासी इन्हें प्यार से 'कालाजी बावजी', 'केसरिया बाबा', और 'धुलेवाधणी' भी कहते हैं।

प्रमुख उत्सव एवं मेले

प्रतिवर्ष होली के आठ दिन बाद चैत्र कृष्ण अष्टमी को भगवान ऋषभदेव का जन्मोत्सव पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर तीन दिवसीय मेला (सप्तमी, अष्टमी तथा नवमी) भी आयोजित होता है, जिसमें दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की तादाद में भक्तगण दर्शनार्थ एवं सेवा-पूजा हेतु आते हैं। जन्मोत्सव पर्व चैत्र कृष्ण अष्टमी को भगवान केसरियाजी की विशाल शोभायात्रा, जन्म कल्याण आरती एवं मंगल दीपक के भव्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

Lord Rishabhdeo in Aangi
Temple on Janmotsav

प्राचीन जलघड़ी और दर्शन व्यवस्था

Ancient Water Clock - Jalghadi

केसरियाजी के इस मंदिर के मुख्य द्वार पर एक जलघड़ी बनी हुई है, जिसके आधार से मंदिर की सेवा-पूजा आदि प्रतिदिन सम्पन्न होती है। यह समय गणना की बेहद प्राचीन परम्पपर है। जलघड़ी को लकड़ी के बक्से में तांबे के बड़े भगोने में पानी भरकर रखा जाता है। इसके अंदर एक तांबे का कटोरा रखा जाता है, जिसमें बने छेद से नियत 24 मिनट के समय में कटोरा भर जाता है। उसी समय पहरेदार एक घंटी बजाकर समय होने का संकेत करता है। इसमें एक 'घड़ी' 24 मिनट की होती है। 8 घड़ी का एक 'पहर' तथा 4 पहर का एक 'दिन' होता है। मंदिर की सेवा-पूजा और आरती का समय शीतकाल व ग्रीष्मकाल में सूर्योदय के साथ बदलता रहता है: प्रातः गजर बजने के साथ मंदिर खुलता है तथा जलघड़ी से निर्धारित समय अनुसार जल, दूध, केसर पूजा के साथ आरती होती है। दोपहर में 2 बजे से पुनः जल, दूध, केसर पूजा के मनोरथ प्रतिदिन होते हैं। सायं 5 बजे सोने-चांदी एवं रत्न जड़ित आंगी का श्रृंगार होता है। संध्याकालीन आरती और भजन के बाद मंदिर मंगल (बंद) होता है।

मंदिर परिसर के अन्य दर्शनीय स्थल

राजकीय आत्मनिर्भर मंदिर श्री ऋषभदेवजी के अन्तर्गत अन्य मंदिरों की सेवा-पूजा व व्यवस्था भी मुख्य मंदिर के बजट से ही की जाती है:

श्री चारभुजाजी मंदिर

श्री चारभुजाजी मंदिर

यह ऋषभदेवजी के मंदिर परिसर में स्थित है। यहाँ वार्षिक त्योहार जैसे जन्माष्टमी, जलझूलनी एकादशी, शरद पूर्णिमा, अन्नकूट, रामनवमी इत्यादि पर्व मनाये जाते हैं।

श्री पार्श्वनाथ जी मंदिर

श्री पार्श्वनाथ जी मंदिर

यह भी मुख्य परिसर में स्थित है। इस मंदिर में पौष माह की दशमी को पार्श्वनाथ भगवान की जयंती मनाई जाती है।

श्री एकलिंग जी सोमनाथ

श्री एकलिंग जी सोमनाथ

मंदिर परिसर में स्थित इस मंदिर में वार्षिक शिवरात्रि का त्योहार और मनसा व्रत का त्योहार मनाया जाता है।

श्री पगल्याजी

श्री पगल्याजी

यह भगवान श्री ऋषभदेव मुख्य मंदिर से 1 किमी की दूरी पर स्थित है। यह भगवान ऋषभदेव जी के प्रादुर्भाव (प्रकट होने) का मूल स्थान है। पगल्याजी परिसर में विश्राम स्थल, चरण पादुका छतरी एवं आमखास बना हुआ है। जन्मोत्सव पर मुख्य मंदिर से भगवान की शोभायात्रा (वरघोड़ा) यहीं पगल्याजी तक आती है और यहाँ सेवा-पूजा के बाद पुनः निज मंदिर में लौट जाती है।

    मंदिर के बारे में | श्री केसरियाजी मंदिर