आरती और भजन
आपके दिल को खुश करने वाले सुंदर भजन और शब्द।
जय जय आरती आदि जिणन्दा। नाभिराया मरूदेवी के नन्दा ।। जय ।। पहली आरती पूजा कीजे, नरभव पामीने ल्हावो लीजे ।। जय ।। दूसरी आरती दीन दयाला, धुलेवा मण्डपमा जग अजुवाला ।। जय ।। तीसरी आरती त्रिभुवन देवा, सुरनर इन्द्र करे तोरी सेवा ।। जय ।। चौथी आरती चऊ गति चुरे, मनवांछित फल शिव सुख पुरे ॥ जय ।। पंचमी आरती पुण्य उपायो, मूलचन्द ऋषभ गुण गायो। जय जय आरती आदि जिणन्दा, नाभिराय मरूदेवी के नन्दा ।।
धनय भाग्य हमारा....... आदेश्वरजी ने, ऋषभदेवजी ने भेटयाजी धनय भाग्य हमारा ।। नाभी राजा कुल भानु प्रकट है जुगला धर्म निवार भविक जीव प्रति बोध करीने पोhच्या मुक्ति में सारा देवल देखंत दुःख मारो भाग्यो, पगता चढंत पाप सारा दर्शन करंत दारिदर भाग्यो, पूजत पुण्य अपाराजी देश देश को संघ जो आवे, laavat केसर प्याला उलट करी प्रभु अंग चढ़ावे, चरण नमी गुण साराजी दूर देशान्तर थी में आयो, श्रवण सुणी गुण गायो पतित उधारण विरद तिहारो, यहा तीरथ जग साराजी ऋषभ नाम से बेडिया टूटे, डुबत जहाज तिरायो रामचन्द्र की ये ही अरज है....... प्रभु का दर्शन मोहे प्याराजी
केसरियाजी ने जहाज को लोग तिरायो एजीम ने यही अचरज भारी आयो...... बीच समुन्दर जहाज डूबता, koi आधार न पायो ऋषभ नाम जपियों सब साथे, जहाज उपर तिर आयो। आदि नाम liyo अन्जाने, अष्टापद पर आयो दीक्षा लेवत केवल उपज्यो, शिवरमणी पद पायो। रावण राजा भक्ति करने को कैलाश गिरीपर आयो नरपति नृत्य किया प्रभु आगे तीर्थंकर गोत्र बन्धायो। ऋषभ नाम की अनंत mahima koi jag mein paar naa paayo इन्द्र नरेन्द्र सेवे प्रभु चरण रामचन्द्र गुण गायो।।
भक्ति की है रात (2), दादा आज थाने आणो है, थाने कोल निभानो हैं ... भक्ति की है रात ... दरबार ओ दादा, ऐसो सज्यो प्यारो दयालु आपरो .. सेवा में ओ दादा, sagळा खड्या आकर, हकुम बस आप रो सेवा में थारी (2), ओ दादा आज बीच जाणो हैं, भक्ति की है रात ... 1 भक्ति हैं ये प्यारी, भक्ति करा जमकर प्रभु क्युं देर करो, वादो थारो दादा, भक्ति में आवा रो, घणी मत देर करो, भजना सु थाने (2), ओ दादा आज तो रिझाणो हैं, भक्ति की है रात ... 2 जा कुछ हैं मारो, अर्पण करा सारो प्रभु स्वीकार करो, भक्तों सु गलती तो होती ही आई हैं, प्रभु मत ध्यान धरो, मारा प्रभुवर (2), थारो दास ओ पुरानो है, भक्ति की है रात ... 3