केसरिया वाले सुन लेना

केसरिया वाले सुन लेना एक सवाल दीवाने का, अगर समझ में आ जाए, तो भक्तों को समझा देना। हमने अपना नियम निभाया, केसरिया पैदल आने का, दादा तेरा क्या फ़र्ज़ नहीं भक्तों के घर आने का॥ जिसका घर छोटा सा हो, क्या उसके घर नहीं आते, या फिर मुझसे प्रेम नहीं, क्यों मेरे घर नहीं आते। अब इतना बतलाओ दादा कैसे तुझे मनाने का, दादा तेरा क्या फ़र्ज़ नहीं भक्तों के घर आने का॥ ऐसा रास्ता ढूंढ लिया रोज मिले तो चैन आए, इक दिन मिलने तुम आओ, इक दिन मिलने हम आए। अब तो पक्का सोच लिया घर केसरिया में बनाने का, दादा तेरा क्या फ़र्ज़ नहीं भक्तों के घर आने का॥ जिसका जिसका घर देखा वो क्या तेरे लगते हैं, रिश्तेदारी में दादा वो क्या हमसे बढ़के हैं। क्या मेरा हक़ नहीं बनता है तुझको घर पे बुलाने का, दादा तेरा क्या फ़र्ज़ नहीं भक्तों के घर आने का॥

श्री केसरियाजी मंदिर, ऋषभदेव

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